माँ मंगळा अष्टकम् Maa Mangalaa Ashtakam

माँ मंगळा अष्टकम्

योगोमाया नित्यकाया सत्यछाया ज्ञानस्वरूपिणी
आदिशक्ति पराशक्ति मूलशक्ति भक्तिप्रदायिनी
सदातृप्ता दीप्ता लिप्ता आत्मगुप्ता सुमनमोहिनी
प्रणमामि माँ मंगळा भुतातीता श्रीक्षेत्र वासिनी ॥१॥

श्वेतवर्णा प्रेमपूर्णा हे अपर्णा क्लेशनिवारिणी
चतुर्भुजा रूपादेवी जगन्माता गोलोकधारिणी
मर्त्त्यलोके उत्कले हे महादेवी अध्यात्मकारिणी
प्रणमामि माँ मंगळा भुतातीता श्रीक्षेत्रवासिनी ॥२॥

पाप पुण्य धर्म कर्म निरिक्षिका सत्कामकामिनी
धन धान्य भूमि स्वर्ण प्रदायिका दीनकृपालिनी
अन्तर्रिपु बहिर्रीपु सर्वरिपु मूलात्संहारिणी
प्रणमामि माँ मंगळा भुतातीता श्रीक्षेत्र वासिनी ॥३॥

आत्मारामे सदास्थिता जगदम्बा सदा उल्लासिनी
आत्मोन्नति ददायिनी सिंहासिनी ज्ञान प्रकाशिनी
दुर्मेधामर्दिनी देवी नारायणी अज्ञान नाशिनी
प्रणमामि माँ मंगळा भुतातीता श्रीक्षेत्र वासिनी ॥४॥

नित्य प्रवासिनी सुरभित हंसिनी दिव्य सुनन्दिनी तरुणी
सौम्यशुद्धरूपा नित्यकृपामयी रम्या गोस्वरूपा हरीणी
विविधरूपिणी यथा राग छन्दिनी चारुचित्रमणि तारिणी
जय जय मंगळा चित्त्कला उत्पला आदिमाता लीलास्वामिनी ॥५॥

सर्व सुख कारिणी सर्व क्लेश नाशिनी विश्व विनोदिनी नंदिनी
हर्षितहर्षिणी चर्चितचर्च्चिणी पुष्पितपुष्पिणी वाहिनी
वंदितवंदिनी कर्षिताकर्षिणी प्रेरितप्रेरिणी भवानी
जय जय मंगळा चित्त्कला उत्पला आदिमाता लीलास्वामिनी ॥६॥

काकटपुरवासिनी सत्य प्रकाशिनी सत्बुद्धिदायिनी नमस्तुभ्यम्
दारूसमीक्षिका कारिका अन्वेषिका वैकुंठनायिका नमस्तुभ्यम्
विष्णुमाया शब्दिता सर्वविश्ववंदिता देवनरपूजिता नमस्तुभ्यम्
हे परम वैष्णवी मायालोके भैरवी पतितस्यबांधवी नमस्तुभ्यम् ॥७॥

सत्यमंगळा घटमंगळा वृकमंगळा नमस्तुभ्यम्
आद्यमंगळा शुद्धमंगळा पूर्णमंगळा नमस्तुभ्यम्
दृष्टिमंगळा वृष्टिमंगळा सृष्टिमंगळा नमस्तुभ्यम्
सर्वमंगळा शिवमंगळा दिव्यमंगळा नमस्तुभ्यम् ॥८॥

तव किंकरः इदं संसारे पतितं क्लेशेस्थितं रक्षमाम्
तव किंकरः इदं दुष्कर्मे लिप्तं कामासक्तं रक्षमाम्
तव किंकरः इदं कृष्णदासमूढ़ं शरणेश्रितं रक्षमाम्
तव किंकरः इदं अश्रुपूर्णनेत्रे विनति त्वं रक्षमाम् ॥0॥

॥ इति श्री कृष्णदासः विरचित माँ मंगळा अष्टकम् सम्पूर्णम् ॥

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